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श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 35: माल्यवान् का रावण को श्रीराम से संधि करने के लिये समझाना  »  श्लोक 20
 
 
श्लोक  6.35.20 
अभिभूय च रक्षांसि ब्रह्मघोषानुदीरयन्।
दिशो विप्रद्रुता: सर्वा: स्तनयित्नुरिवोष्णगे॥ २०॥
 
 
अनुवाद
उन्होंने वैदिक मन्त्रों की ध्वनि को बढ़ा दिया है, जिससे राक्षस दब गए हैं; इसलिए ग्रीष्म ऋतु में बादलों की तरह राक्षस सभी दिशाओं में भाग गए हैं।
 
He has amplified the sound of the Vedic mantras, overwhelming the demons; therefore, like clouds in summer, the demons have fled in all directions.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)