श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 35: माल्यवान् का रावण को श्रीराम से संधि करने के लिये समझाना  »  श्लोक 15
 
 
श्लोक  6.35.15 
तत् त्वया चरता लोकान् धर्मोऽपि निहतो महान्।
अधर्म: प्रगृहीतश्च तेनास्मद् बलिन: परे॥ १५॥
 
 
अनुवाद
तुमने समस्त लोकों में विजय हेतु भ्रमण करते हुए महान धर्म का नाश करके अधर्म को अपना लिया है, इसीलिए हमारे शत्रु हमसे अधिक बलवान हैं।
 
While roaming in all the worlds for conquest, you have destroyed the great Dharma and embraced Adharma, that is why our enemies are stronger than us.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)