श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 35: माल्यवान् का रावण को श्रीराम से संधि करने के लिये समझाना  »  श्लोक 11
 
 
श्लोक  6.35.11 
तस्य देवर्षय: सर्वे गन्धर्वाश्च जयैषिण:।
विरोधं मा गमस्तेन संधिस्ते तेन रोचताम्॥ ११॥
 
 
अनुवाद
देखो, देवता, ऋषि और गन्धर्व सभी श्री रामजी की विजय चाहते हैं, अतः तुम्हें उनका विरोध नहीं करना चाहिए, केवल उनसे संधि करने की इच्छा करनी चाहिए॥ 11॥
 
‘Look, the gods, sages and Gandharvas all want victory for Shri Ram, so you should not oppose them. You should only wish to enter into a treaty with them.॥ 11॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)