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ramayan 6.34.5: ऐसा कहकर सीताजी अपनी मधुर और स्नेहमयी वाणी से, जो पहले शोक से भरी हुई थी, इस प्रकार बोलीं-॥5॥   |   ramayan सर्ग 6.34: सीता के अनुरोध से सरमा का उन्हें मन्त्रियों सहित रावण का निश्चित विचार बताना   ।   ramayan काण्ड 6: युद्ध काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 34: सीता के अनुरोध से सरमा का उन्हें मन्त्रियों सहित रावण का निश्चित विचार बताना  »  श्लोक 5
 
 
श्लोक  6.34.5 
एवं ब्रुवाणां तां सीता सरमामिदमब्रवीत्।
मधुरं श्लक्ष्णया वाचा पूर्वशोकाभिपन्नया॥ ५॥
 
 
अनुवाद
ऐसा कहकर सीताजी अपनी मधुर और स्नेहमयी वाणी से, जो पहले शोक से भरी हुई थी, इस प्रकार बोलीं-॥5॥
 
Having said such things, Sita, in her sweet and affectionate voice which was earlier filled with grief, spoke thus -॥ 5॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)