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ramayan 6.34.4: 'यहाँ तक कि वायु या गरुड़ भी आधारहीन आकाश में तीव्र गति से चलने वाली मेरी गति का अनुसरण करने में समर्थ नहीं हैं।'   |   ramayan सर्ग 6.34: सीता के अनुरोध से सरमा का उन्हें मन्त्रियों सहित रावण का निश्चित विचार बताना   ।   ramayan काण्ड 6: युद्ध काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 34: सीता के अनुरोध से सरमा का उन्हें मन्त्रियों सहित रावण का निश्चित विचार बताना  »  श्लोक 4
 
 
श्लोक  6.34.4 
नहि मे क्रममाणाया निरालम्बे विहायसि।
समर्थो गतिमन्वेतुं पवनो गरुडोऽपि वा॥ ४॥
 
 
अनुवाद
'यहाँ तक कि वायु या गरुड़ भी आधारहीन आकाश में तीव्र गति से चलने वाली मेरी गति का अनुसरण करने में समर्थ नहीं हैं।'
 
‘Even the wind or Garuda is not capable of following my movement moving at a great speed in the baseless sky.’
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)