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ramayan 6.34.16: वहाँ पहुँचकर उसने देखा कि जनक की पुत्री बैठी उसकी प्रतीक्षा कर रही है। वह देवी लक्ष्मी के समान लग रही थी, जिनके हाथ से कमल का फूल गिर गया था।   |   ramayan सर्ग 6.34: सीता के अनुरोध से सरमा का उन्हें मन्त्रियों सहित रावण का निश्चित विचार बताना   ।   ramayan काण्ड 6: युद्ध काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 34: सीता के अनुरोध से सरमा का उन्हें मन्त्रियों सहित रावण का निश्चित विचार बताना  »  श्लोक 16
 
 
श्लोक  6.34.16 
सा प्रविष्टा ततस्तत्र ददर्श जनकात्मजाम्।
प्रतीक्षमाणां स्वामेव भ्रष्टपद्मामिव श्रियम्॥ १६॥
 
 
अनुवाद
वहाँ पहुँचकर उसने देखा कि जनक की पुत्री बैठी उसकी प्रतीक्षा कर रही है। वह देवी लक्ष्मी के समान लग रही थी, जिनके हाथ से कमल का फूल गिर गया था।
 
Entering there he saw Janaka's daughter sitting there waiting for him. She looked like Goddess Lakshmi whose lotus flower had fallen from her hand.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)