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ramayan 6.33.37: जैसे अच्छी वर्षा से अभिषिक्त होकर पृथ्वी हरी-भरी हो जाती है, वैसे ही महात्मा श्री रामजी द्वारा सम्मानित होकर तुम भी आनंद से भर जाओगे॥ 37॥   |   ramayan सर्ग 6.33: सरमा का सीता को सान्त्वना देना, रावण की माया का भेद खोलना, श्रीराम के आगमन और उनके विजयी होने का विश्वास दिलाना   ।   ramayan काण्ड 6: युद्ध काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 33: सरमा का सीता को सान्त्वना देना, रावण की माया का भेद खोलना, श्रीराम के आगमन और उनके विजयी होने का विश्वास दिलाना  »  श्लोक 37
 
 
श्लोक  6.33.37 
सभाजिता त्वं रामेण मोदिष्यसि महात्मना।
सुवर्षेण समायुक्ता यथा सस्येन मेदिनी॥ ३७॥
 
 
अनुवाद
जैसे अच्छी वर्षा से अभिषिक्त होकर पृथ्वी हरी-भरी हो जाती है, वैसे ही महात्मा श्री रामजी द्वारा सम्मानित होकर तुम भी आनंद से भर जाओगे॥ 37॥
 
Just as the earth blossoms with lush greenery after being anointed with good rain, similarly you will be filled with joy after being honoured by the great soul Shri Ram.॥ 37॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)