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ramayan 6.33.36: मिथिलेशकुमारी! श्री राम समरांगण में शीघ्र ही रावण का वध करके सुख भोगें, आप यशस्वी हों तथा अपने प्रियतम के साथ इच्छित सुख प्राप्त करें।   |   ramayan सर्ग 6.33: सरमा का सीता को सान्त्वना देना, रावण की माया का भेद खोलना, श्रीराम के आगमन और उनके विजयी होने का विश्वास दिलाना   ।   ramayan काण्ड 6: युद्ध काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 33: सरमा का सीता को सान्त्वना देना, रावण की माया का भेद खोलना, श्रीराम के आगमन और उनके विजयी होने का विश्वास दिलाना  »  श्लोक 36
 
 
श्लोक  6.33.36 
रावणं समरे हत्वा नचिरादेव मैथिलि।
त्वया समग्र: प्रियया सुखार्हो लप्स्यते सुखम्॥ ३६॥
 
 
अनुवाद
मिथिलेशकुमारी! श्री राम समरांगण में शीघ्र ही रावण का वध करके सुख भोगें, आप यशस्वी हों तथा अपने प्रियतम के साथ इच्छित सुख प्राप्त करें।
 
Mithileshkumari! May Shri Ram be able to enjoy happiness by killing Ravana soon in Samarangana, may you be successful and will attain the desired happiness with your beloved.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)