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ramayan 6.33.3: सरमा रावण के आदेश पर सीताजी की रक्षा करती थीं। उनकी अपनी शिष्या सीता से मित्रता हो गई थी। वह अत्यंत दयालु और दृढ़निश्चयी थीं।   |   ramayan सर्ग 6.33: सरमा का सीता को सान्त्वना देना, रावण की माया का भेद खोलना, श्रीराम के आगमन और उनके विजयी होने का विश्वास दिलाना   ।   ramayan काण्ड 6: युद्ध काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 33: सरमा का सीता को सान्त्वना देना, रावण की माया का भेद खोलना, श्रीराम के आगमन और उनके विजयी होने का विश्वास दिलाना  »  श्लोक 3
 
 
श्लोक  6.33.3 
सा हि तत्र कृता मित्रं सीतया रक्ष्यमाणया।
रक्षन्ती रावणादिष्टा सानुक्रोशा दृढव्रता॥ ३॥
 
 
अनुवाद
सरमा रावण के आदेश पर सीताजी की रक्षा करती थीं। उनकी अपनी शिष्या सीता से मित्रता हो गई थी। वह अत्यंत दयालु और दृढ़निश्चयी थीं।
 
Sarma used to protect Sitaji on the orders of Ravana. She had become friends with her protege Sita. She was very kind and determined. 3.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)