श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 33: सरमा का सीता को सान्त्वना देना, रावण की माया का भेद खोलना, श्रीराम के आगमन और उनके विजयी होने का विश्वास दिलाना  »  श्लोक 29-30
 
 
श्लोक  6.33.29-30 
राम: कमलपत्राक्षो दैत्यानामिव वासव:॥ २९॥
अवजित्य जितक्रोधस्तमचिन्त्यपराक्रम:।
रावणं समरे हत्वा भर्ता त्वाधिगमिष्यति॥ ३०॥
 
 
अनुवाद
तुम्हारे पति कमलनयन श्री राम ने क्रोध को जीत लिया है। उनका पराक्रम अकल्पनीय है। जैसे इंद्र दैत्यों को परास्त करते हैं, वैसे ही वे समरांगण में दैत्यों को परास्त करके रावण का वध करके तुम्हें प्राप्त करेंगे। 29-30॥
 
Your husband Kamalnayan Shri Ram has won the anger. His bravery is unimaginable. Like Indra who defeats the demons, he will defeat the demons and kill Ravana in Samarangana and attain you. 29-30॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)