श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 33: सरमा का सीता को सान्त्वना देना, रावण की माया का भेद खोलना, श्रीराम के आगमन और उनके विजयी होने का विश्वास दिलाना  »  श्लोक 24-26
 
 
श्लोक  6.33.24-26 
शस्त्राणां च प्रसन्नानां चर्मणां वर्मणां तथा॥ २४॥
रथवाजिगजानां च राक्षसेन्द्रानुयायिनाम्।
सम्भ्रमो रक्षसामेष हृषितानां तरस्विनाम्॥ २५॥
प्रभां विसृजतां पश्य नानावर्णसमुत्थिताम्।
वनं निर्दहतो घर्मे यथा रूपं विभावसो:॥ २६॥
 
 
अनुवाद
'देखो, नाना प्रकार की चमक बिखेरने वाले चमकते हुए अस्त्र-शस्त्र, ढाल और कवचों को। इस समय राक्षसराज रावण के पीछे चलने वाले रथों, घोड़ों, हाथियों और रोमांचित एवं वेगवान राक्षसों में बड़ी फुर्ती दिखाई दे रही है। जैसे ग्रीष्म ऋतु में दावानल का प्रज्वलित रूप दिखाई देता है, वैसी ही चमक इन अस्त्र-शस्त्रों आदि में दिखाई दे रही है॥ 24-26॥
 
‘Look at the gleaming weapons, shields and armours that are emitting various kinds of radiance. At this time, a great hurry is visible in the chariots, horses, elephants and the thrilled and fast demons following the demon king Ravana. Just like the blazing form of a forest fire burning in the summer season, the same radiance is visible in these weapons etc.॥ 24-26॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)