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ramayan 6.33.2: सीता राक्षसराज की माया से मोहित होकर महान दुःख में थीं। उस समय मृदुभाषी सरमा ने उन्हें अपने वचनों से सान्त्वना दी।   |   ramayan सर्ग 6.33: सरमा का सीता को सान्त्वना देना, रावण की माया का भेद खोलना, श्रीराम के आगमन और उनके विजयी होने का विश्वास दिलाना   ।   ramayan काण्ड 6: युद्ध काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 33: सरमा का सीता को सान्त्वना देना, रावण की माया का भेद खोलना, श्रीराम के आगमन और उनके विजयी होने का विश्वास दिलाना  »  श्लोक 2
 
 
श्लोक  6.33.2 
मोहितां राक्षसेन्द्रेण सीतां परमदु:खिताम्।
आश्वासयामास तदा सरमा मृदुभाषिणी॥ २॥
 
 
अनुवाद
सीता राक्षसराज की माया से मोहित होकर महान दुःख में थीं। उस समय मृदुभाषी सरमा ने उन्हें अपने वचनों से सान्त्वना दी।
 
Sita was enchanted by the illusion of the demon king and was in great sorrow. At that time the soft-spoken Sarma consoled her with her words.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)