श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 33: सरमा का सीता को सान्त्वना देना, रावण की माया का भेद खोलना, श्रीराम के आगमन और उनके विजयी होने का विश्वास दिलाना  »  श्लोक 15
 
 
श्लोक  6.33.15 
उत्तीर्य सागरं राम: सह वानरसेनया।
संनिविष्ट: समुद्रस्य तीरमासाद्य दक्षिणम्॥ १५॥
 
 
अनुवाद
श्री रामचन्द्रजी अपनी वानर सेना के साथ समुद्र पार करके इस ओर आ रहे हैं। उन्होंने समुद्र के दक्षिणी तट पर डेरा डाला है॥15॥
 
‘Sri Ramachandraji is crossing the ocean with his monkey army and coming to this side. He has camped on the southern shore of the ocean.॥ 15॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)