Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 ramayan 6.33.13: रावण की बुद्धि और कर्म दोनों ही दुष्ट हैं। वह समस्त प्राणियों का शत्रु, क्रूर और कपटी है। उसने तुम पर माया का प्रयोग किया (वह सिर और धनुष माया से उत्पन्न हुए थे)॥13॥ | ramayan सर्ग 6.33: सरमा का सीता को सान्त्वना देना, रावण की माया का भेद खोलना, श्रीराम के आगमन और उनके विजयी होने का विश्वास दिलाना । ramayan काण्ड 6: युद्ध काण्ड । श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
अयुक्तबुद्धिकृत्येन सर्वभूतविरोधिना।
एवं प्रयुक्ता रौद्रेण माया मायाविना त्वयि॥ १३॥
अनुवाद
रावण की बुद्धि और कर्म दोनों ही दुष्ट हैं। वह समस्त प्राणियों का शत्रु, क्रूर और कपटी है। उसने तुम पर माया का प्रयोग किया (वह सिर और धनुष माया से उत्पन्न हुए थे)॥13॥
‘Both Ravan's intellect and actions are evil. He is the enemy of all beings, cruel and deceptive. He used this illusion on you (that head and bow were created by illusion).॥ 13॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥