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ramayan 6.33.1: विदेहनन्दिनी सीता को प्रेम में पड़ी हुई देखकर सरमा नाम की राक्षसी उनके पास उसी प्रकार आई, जैसे कोई प्रेमी सखा अपनी प्रिय सखी के पास जाता है।   |   ramayan सर्ग 6.33: सरमा का सीता को सान्त्वना देना, रावण की माया का भेद खोलना, श्रीराम के आगमन और उनके विजयी होने का विश्वास दिलाना   ।   ramayan काण्ड 6: युद्ध काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  6.33.1 
सीतां तु मोहितां दृष्ट्वा सरमा नाम राक्षसी।
आससादाथ वैदेहीं प्रियां प्रणयिनी सखीम्॥ १॥
 
 
अनुवाद
विदेहनन्दिनी सीता को प्रेम में पड़ी हुई देखकर सरमा नाम की राक्षसी उनके पास उसी प्रकार आई, जैसे कोई प्रेमी सखा अपनी प्रिय सखी के पास जाता है।
 
Seeing Videhanandini Sita lying in love, the demoness named Sarma came to her in the same way as a loving friend goes to her beloved friend.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)