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ramayan 6.32.9: ‘पत्नी के सामने पति का मर जाना पत्नी के लिए बड़ा भयंकर पाप कहा गया है। मेरे लिए यह बड़े दुःख की बात है कि आप जैसे धर्मात्मा पति मेरे सामने मर गए, जबकि मैं पतिव्रता स्त्री हूँ।॥9॥   |   ramayan सर्ग 6.32: श्रीराम के मारे जाने का विश्वास करके सीता का विलाप तथा रावण का सभा में जाकर मन्त्रियों के सलाह से युद्धविषयक उद्योग करना   ।   ramayan काण्ड 6: युद्ध काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 32: श्रीराम के मारे जाने का विश्वास करके सीता का विलाप तथा रावण का सभा में जाकर मन्त्रियों के सलाह से युद्धविषयक उद्योग करना  »  श्लोक 9
 
 
श्लोक  6.32.9 
प्रथमं मरणं नार्या भर्तुर्वैगुण्यमुच्यते।
सुवृत्त: साधुवृत्ताया: संवृत्तस्त्वं ममाग्रत:॥ ९॥
 
 
अनुवाद
‘पत्नी के सामने पति का मर जाना पत्नी के लिए बड़ा भयंकर पाप कहा गया है। मेरे लिए यह बड़े दुःख की बात है कि आप जैसे धर्मात्मा पति मेरे सामने मर गए, जबकि मैं पतिव्रता स्त्री हूँ।॥9॥
 
‘The death of the husband before the wife is said to be a very disastrous sin for the wife. It is a matter of great sorrow for me that a virtuous husband like you died in front of me while I am a virtuous and faithful woman.॥ 9॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)