vedamrit
Reset
Home
प्रमुख ग्रंथ
भगवद गीता
श्रीमद् रामायण
श्रीमद् भागवतम
श्री महाभारत
श्री रामचरितमानस
श्रीमद् विष्णु पुराण
श्रीचैतन्य भागवत
श्रीचैतन्य चरितामृत
भक्तिरसामृतसिन्धु
वैष्णव भजन, इस्कॉन आरती
Articles
Apps
About
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण
»
काण्ड 6: युद्ध काण्ड
»
सर्ग 32: श्रीराम के मारे जाने का विश्वास करके सीता का विलाप तथा रावण का सभा में जाकर मन्त्रियों के सलाह से युद्धविषयक उद्योग करना
»
श्लोक 7
श्लोक
6.32.7
सा मुहूर्तात् समाश्वस्य परिलभ्याथ चेतनाम्।
तच्छिर: समुपास्थाय विललापायतेक्षणा॥ ७॥
अनुवाद
फिर दो घड़ी में उसे होश आ गया और बड़े-बड़े नेत्रों वाली सीता कुछ धैर्य धारण करके सिर को अपने पास रखकर विलाप करने लगीं-॥7॥
Then in two hours she regained consciousness and the big-eyed Sita, gathering some patience, kept the head close to her and started lamenting -॥ 7॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2023 vedamrit.in - All Rights Reserved. Developed by ACd
Download SongBook App
Install
×