vedamrit
Reset
Home
प्रमुख ग्रंथ
भगवद गीता
श्रीमद् रामायण
श्रीमद् भागवतम
श्री महाभारत
श्री रामचरितमानस
श्रीमद् विष्णु पुराण
श्रीचैतन्य भागवत
श्रीचैतन्य चरितामृत
भक्तिरसामृतसिन्धु
वैष्णव भजन, इस्कॉन आरती
About
Contact
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण
»
काण्ड 6: युद्ध काण्ड
»
सर्ग 32: श्रीराम के मारे जाने का विश्वास करके सीता का विलाप तथा रावण का सभा में जाकर मन्त्रियों के सलाह से युद्धविषयक उद्योग करना
»
श्लोक 5
श्लोक
6.32.5
आर्येण किं नु कैकेय्या: कृतं रामेण विप्रियम्।
यन्मया चीरवसनं दत्त्वा प्रव्राजितो वनम्॥ ५॥
अनुवाद
आर्य श्री राम ने कैकेयी का ऐसा कौन-सा अपराध किया था, जिसके कारण उसने उन्हें चीथड़ा देकर मेरे साथ वन में भेज दिया?’ ॥5॥
What crime did Arya Shri Ram commit against Kaikeyi, due to which she gave him a rag and sent him to the forest with me?' ॥ 5॥
✨ ai-generated
Connect Form
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by acd
Download Vedamrit Android App
Install
×