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ramayan 6.32.35: उन्होंने रावण को ‘आर्यपुत्र महाराज की जय’ कहकर अभिवादन किया और उसे प्रसन्न करते हुए बताया कि ‘सेनापति प्रहस्त आ गये हैं।’ 35.   |   ramayan सर्ग 6.32: श्रीराम के मारे जाने का विश्वास करके सीता का विलाप तथा रावण का सभा में जाकर मन्त्रियों के सलाह से युद्धविषयक उद्योग करना   ।   ramayan काण्ड 6: युद्ध काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  6.32.35 
विजयस्वार्यपुत्रेति सोऽभिवाद्य प्रसाद्य च।
न्यवेदयदनुप्राप्तं प्रहस्तं वाहिनीपतिम्॥ ३५॥
 
 
अनुवाद
उन्होंने रावण को ‘आर्यपुत्र महाराज की जय’ कहकर अभिवादन किया और उसे प्रसन्न करते हुए बताया कि ‘सेनापति प्रहस्त आ गये हैं।’ 35.
 
He greeted Ravana by saying, 'Hail Aryaputra Maharaja' and, making him happy, informed him that 'Commander Prahast has arrived.' 35.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)