Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 ramayan 6.32.30: जिनके पास सब लोग याचक बनकर आते थे और जिन्हें सब अतिथि प्रिय थे, उनकी पत्नी होकर आज जो मैं शोक कर रही हूँ, उससे यह प्रकट होता है कि पूर्वजन्म में मैंने दान के उत्तम कर्तव्य में अवश्य ही बाधा डाली थी॥30॥ | ramayan सर्ग 6.32: श्रीराम के मारे जाने का विश्वास करके सीता का विलाप तथा रावण का सभा में जाकर मन्त्रियों के सलाह से युद्धविषयक उद्योग करना । ramayan काण्ड 6: युद्ध काण्ड । श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
जिनके पास सब लोग याचक बनकर आते थे और जिन्हें सब अतिथि प्रिय थे, उनकी पत्नी होकर आज जो मैं शोक कर रही हूँ, उससे यह प्रकट होता है कि पूर्वजन्म में मैंने दान के उत्तम कर्तव्य में अवश्य ही बाधा डाली थी॥30॥
Being the wife of Shri Ram, to whom everyone came as a beggar and to whom all guests were dear, the fact that I am mourning today shows that in my previous life I had certainly obstructed the excellent duty of charity.॥ 30॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥