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ramayan 6.32.23: जिस तुम्हारे रूप को मैंने अनेक शुभ अनुष्ठानों के साथ धारण किया था, आज उसे मांसाहारी पशुओं द्वारा इधर-उधर घसीटा जा रहा है।   |   ramayan सर्ग 6.32: श्रीराम के मारे जाने का विश्वास करके सीता का विलाप तथा रावण का सभा में जाकर मन्त्रियों के सलाह से युद्धविषयक उद्योग करना   ।   ramayan काण्ड 6: युद्ध काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  6.32.23 
कल्याणै रुचिरं गात्रं परिष्वक्तं मयैव तु।
क्रव्यादैस्तच्छरीरं ते नूनं विपरिकृष्यते॥ २३॥
 
 
अनुवाद
जिस तुम्हारे रूप को मैंने अनेक शुभ अनुष्ठानों के साथ धारण किया था, आज उसे मांसाहारी पशुओं द्वारा इधर-उधर घसीटा जा रहा है।
 
The very form of yours which I had embraced with many auspicious rituals must today be dragged here and there by carnivorous animals.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)