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ramayan 6.31.8: निश्चर! तुम माया से बने श्री रामचन्द्र का सिर लेकर महान धनुष-बाण लेकर मेरे पास आओ।'   |   ramayan सर्ग 6.31: मायारचित श्रीराम का कटा मस्तक दिखाकर रावण द्वारा सीता को मोह में डालने का प्रयत्न   ।   ramayan काण्ड 6: युद्ध काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  6.31.8 
शिरो मायामयं गृह्य राघवस्य निशाचर।
मां त्वं समुपतिष्ठस्व महच्च सशरं धनु:॥ ८॥
 
 
अनुवाद
निश्चर! तुम माया से बने श्री रामचन्द्र का सिर लेकर महान धनुष-बाण लेकर मेरे पास आओ।'
 
Nishchar! You take the head of Shri Ramchandra made of illusion and come to me with a great bow and arrow.'
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)