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ramayan 6.31.5: वीर योद्धा रावण ने शीघ्रतापूर्वक उचित कर्तव्य का विचार करके अपने मंत्रियों को विदा किया और अपने महल में प्रवेश किया ॥5॥   |   ramayan सर्ग 6.31: मायारचित श्रीराम का कटा मस्तक दिखाकर रावण द्वारा सीता को मोह में डालने का प्रयत्न   ।   ramayan काण्ड 6: युद्ध काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  6.31.5 
मन्त्रयित्वा तु दुर्धर्ष: क्षमं यत् तदनन्तरम्।
विसर्जयित्वा सचिवान् प्रविवेश स्वमालयम्॥ ५॥
 
 
अनुवाद
वीर योद्धा रावण ने शीघ्रतापूर्वक उचित कर्तव्य का विचार करके अपने मंत्रियों को विदा किया और अपने महल में प्रवेश किया ॥5॥
 
The valiant warrior Ravana, after quickly discussing the right duty, dismissed his ministers and entered his palace. ॥ 5॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)