Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 ramayan 6.31.45: जब विद्युज्जिह्वा ने अपना सिर वहाँ रखा, तो रावण ने धनुष सहित पृथ्वी पर फेंक दिया। तत्पश्चात उसने विदेह राजकुमारी यशस्विनी सीता से कहा - 'अब तुम मेरे अधीन हो।' | ramayan सर्ग 6.31: मायारचित श्रीराम का कटा मस्तक दिखाकर रावण द्वारा सीता को मोह में डालने का प्रयत्न । ramayan काण्ड 6: युद्ध काण्ड । श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
स विद्युज्जिह्वेन सहैव तच्छिरो
धनुश्च भूमौ विनिकीर्यमाण:।
विदेहराजस्य सुतां यशस्विनीं
ततोऽब्रवीत् तां भव मे वशानुगा॥ ४५॥
अनुवाद
जब विद्युज्जिह्वा ने अपना सिर वहाँ रखा, तो रावण ने धनुष सहित पृथ्वी पर फेंक दिया। तत्पश्चात उसने विदेह राजकुमारी यशस्विनी सीता से कहा - 'अब तुम मेरे अधीन हो।'
When Vidyujjihva placed his head there, Ravana threw the bow on the earth along with it. Thereafter he said to Videha princess Yashaswini Sita - 'Now you are under my control'.
इत्यार्षे श्रीमद्रामायणे वाल्मीकीये आदिकाव्ये युद्धकाण्डे एकत्रिंश: सर्ग: ॥ ३ १॥
इस प्रकार श्रीवाल्मीकिनिर्मित आर्षरामायण आदिकाव्यके युद्धकाण्डमें इकतीसवाँ सर्ग पूरा हुआ ॥ ३ १॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥