श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 31: मायारचित श्रीराम का कटा मस्तक दिखाकर रावण द्वारा सीता को मोह में डालने का प्रयत्न  »  श्लोक 39-40
 
 
श्लोक  6.31.39-40 
विद्युज्जिह्वस्तदा गृह्य शिरस्तत्सशरासनम्।
प्रणामं शिरसा कृत्वा रावणस्याग्रत: स्थित:॥ ३९॥
तमब्रवीत् ततो राजा रावणो राक्षसं स्थितम्।
विद्युज्जिह्वं महाजिह्वं समीपपरिवर्तिनम्॥ ४०॥
 
 
अनुवाद
तब विद्युज्जिह्वा धनुष सहित उस सिर को ले आया और सिर झुकाकर प्रणाम करके रावण के सामने खड़ा हो गया। उस समय राजा रावण अपने निकट खड़े विशाल जिह्वा वाले राक्षस से बोला -
 
Then Vidyujjihva brought that head along with the bow and bowed his head and stood in front of Ravana after saluting him. At that time, King Ravana spoke to the demon with a huge tongue standing near him -
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)