Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
ramayan 6.31.34: कोई समुद्र में कूद गया है और कोई आकाश में उड़ गया है। बहुत से रीछ बन्दरवृत्ति अपनाकर वृक्षों पर चढ़ गए हैं॥ 34॥   |   ramayan सर्ग 6.31: मायारचित श्रीराम का कटा मस्तक दिखाकर रावण द्वारा सीता को मोह में डालने का प्रयत्न   ।   ramayan काण्ड 6: युद्ध काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 31: मायारचित श्रीराम का कटा मस्तक दिखाकर रावण द्वारा सीता को मोह में डालने का प्रयत्न  »  श्लोक 34
 
 
श्लोक  6.31.34 
सागरे पतिता: केचित् केचिद् गगनमाश्रिता:।
ऋक्षा वृक्षानुपारूढा वानरीं वृत्तिमाश्रिता:॥ ३४॥
 
 
अनुवाद
कोई समुद्र में कूद गया है और कोई आकाश में उड़ गया है। बहुत से रीछ बन्दरवृत्ति अपनाकर वृक्षों पर चढ़ गए हैं॥ 34॥
 
‘Some have jumped into the sea and some have flown into the sky. Many bears have adopted the monkey instinct and climbed trees.॥ 34॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)