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ramayan 6.31.13-14h: उनके चारों ओर बहुत सी भयंकर राक्षसियाँ बैठी हुई थीं। रावण बड़े हर्ष के साथ जनकपुत्री सीता के पास गया और उनसे अपना नाम बताया तथा निर्लज्ज शब्दों में बोला -॥13 1/2॥   |   ramayan सर्ग 6.31: मायारचित श्रीराम का कटा मस्तक दिखाकर रावण द्वारा सीता को मोह में डालने का प्रयत्न   ।   ramayan काण्ड 6: युद्ध काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  6.31.13-14h 
उपास्यमानां घोराभी राक्षसीभिरदूरत:।
उपसृत्य तत: सीतां प्रहर्षं नाम कीर्तयन्॥ १३॥
इदं च वचनं धृष्टमुवाच जनकात्मजाम्।
 
 
अनुवाद
उनके चारों ओर बहुत सी भयंकर राक्षसियाँ बैठी हुई थीं। रावण बड़े हर्ष के साथ जनकपुत्री सीता के पास गया और उनसे अपना नाम बताया तथा निर्लज्ज शब्दों में बोला -॥13 1/2॥
 
Many fierce demonesses were sitting around them. Ravana went to Janak's daughter Sita with great joy and told her his name and said in impudent words -॥ 13 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)