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तस्य तुष्टोऽभवद् राजा प्रददौ च विभूषणम्।
अशोकवनिकायां च सीतादर्शनलालस:॥ १०॥
नैर्ऋतानामधिपति: संविवेश महाबल:।
अनुवाद
इससे राजा रावण बहुत प्रसन्न हुआ और उसने अपने आभूषण उतारकर उसे दे दिए। तब वह महाबली राक्षसराज सीताजी के दर्शन हेतु अशोक वाटिका में गया।
Due to this, King Ravana was very pleased and he took off his ornaments and gave them to him. Then that mighty demon king went to Ashok Vatika to see Sitaji.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥