श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 30: रावण के भेजे हुए गुप्तचरों एवं शार्दूल का उससे वानर-सेना का समाचार बताना और मुख्य-मुख्य वीरों का परिचय देना  »  श्लोक 34
 
 
श्लोक  6.30.34 
राक्षसानां वरिष्ठश्च तव भ्राता विभीषण:।
प्रतिगृह्य पुरीं लङ्कां राघवस्य हिते रत:॥ ३४॥
 
 
अनुवाद
‘तुम्हारा भाई राक्षसराज विभीषण लंका का राज्य प्राप्त करके श्री रघुनाथजी के कल्याण में ही तत्पर रहता है।
 
‘Your brother, Vibhishana, the chief of the demons, after taking the kingdom of Lanka, remains devoted to the welfare of Shri Raghunathji only.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)