श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 30: रावण के भेजे हुए गुप्तचरों एवं शार्दूल का उससे वानर-सेना का समाचार बताना और मुख्य-मुख्य वीरों का परिचय देना  »  श्लोक 31
 
 
श्लोक  6.30.31 
लक्ष्मणश्चात्र धर्मात्मा मातंगानामिवर्षभ:।
यस्य बाणपथं प्राप्य न जीवेदपि वासव:॥ ३१॥
 
 
अनुवाद
धर्मात्मा लक्ष्मण श्रेष्ठ गजराज के समान पराक्रमी हैं। उनके बाणों का लक्ष्य बनने पर देवताओं के राजा इन्द्र भी जीवित नहीं बच सकते।॥31॥
 
The virtuous Lakshmana is as valiant as the best elephant king. Even the king of the gods, Indra, cannot survive if he becomes the target of his arrows.॥ 31॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)