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श्रीमद् वाल्मीकि रामायण
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सर्ग 30: रावण के भेजे हुए गुप्तचरों एवं शार्दूल का उससे वानर-सेना का समाचार बताना और मुख्य-मुख्य वीरों का परिचय देना
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श्लोक 12
श्लोक
6.30.12
गरुडव्यूहमास्थाय सर्वतो हरिभिर्वृत:।
मां विसृज्य महातेजा लङ्कामेवातिवर्तते॥ १२॥
अनुवाद
महाबली रघुनाथजी गरुड़व्यूह का आश्रय लेकर वानरों के बीच बैठे हैं। मुझे विदा करके वे लंका की ओर जा रहे हैं।
The mighty Raghunathji is sitting amidst the monkeys, taking shelter of Garudavyuha. After bidding me farewell, he is riding towards Lanka.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
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हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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