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श्लोक 11
श्लोक
6.30.11
एष शैलशिलाभिस्तु पूरयित्वा महार्णवम्।
द्वारमाश्रित्य लङ्काया रामस्तिष्ठति सायुध:॥ ११॥
अनुवाद
‘समुद्र को पर्वत शिलाओं से भरकर, श्री रामजी लंका के द्वार पर आ पहुँचे हैं और हाथ में धनुष लिए हुए वहाँ खड़े हैं।॥11॥
‘Having filled up the sea with mountain boulders, Sri Rama has arrived at the gates of Lanka and is standing there holding a bow in his hand.॥ 11॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
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हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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