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ramayan 6.29.27: तब वानरों ने उसे पीटना आरम्भ कर दिया। तब भगवान् राम ने दया करके उसे तथा अन्य राक्षसों को भी मुक्त कर दिया॥ 27॥   |   ramayan सर्ग 6.29: रावण का शुक और सारण को फटकारना,उसके भेजे गुप्तचरों का श्रीराम की दया से वानरों के चंगुल से छूटकर लङ्का में आना   ।   ramayan काण्ड 6: युद्ध काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 29: रावण का शुक और सारण को फटकारना,उसके भेजे गुप्तचरों का श्रीराम की दया से वानरों के चंगुल से छूटकर लङ्का में आना  »  श्लोक 27
 
 
श्लोक  6.29.27 
मोचित: सोऽपि रामेण वध्यमान: प्लवंगमै:।
आनृशंस्येन रामेण मोचिता राक्षसा: परे॥ २७॥
 
 
अनुवाद
तब वानरों ने उसे पीटना आरम्भ कर दिया। तब भगवान् राम ने दया करके उसे तथा अन्य राक्षसों को भी मुक्त कर दिया॥ 27॥
 
Then the monkeys started beating him. Then Lord Rama out of mercy freed him and the other demons too.॥ 27॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)