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ramayan 6.29.25: उस वानरों की सेना को देखकर वे भय से व्याकुल हो गए। इतने में ही धर्मात्मा राक्षसराज विभीषण ने उन समस्त राक्षसों को देखा ॥25॥   |   ramayan सर्ग 6.29: रावण का शुक और सारण को फटकारना,उसके भेजे गुप्तचरों का श्रीराम की दया से वानरों के चंगुल से छूटकर लङ्का में आना   ।   ramayan काण्ड 6: युद्ध काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 29: रावण का शुक और सारण को फटकारना,उसके भेजे गुप्तचरों का श्रीराम की दया से वानरों के चंगुल से छूटकर लङ्का में आना  »  श्लोक 25
 
 
श्लोक  6.29.25 
प्रेक्षमाणाश्चमूं तां च बभूवुर्भयविह्वला:।
ते तु धर्मात्मना दृष्टा राक्षसेन्द्रेण राक्षसा:॥ २५॥
 
 
अनुवाद
उस वानरों की सेना को देखकर वे भय से व्याकुल हो गए। इतने में ही धर्मात्मा राक्षसराज विभीषण ने उन समस्त राक्षसों को देखा ॥25॥
 
Seeing that army of monkeys they became distraught with fear. Meanwhile, the righteous demon king Vibhishana saw all those demons. 25॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)