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ramayan 6.29.21: यदि गुप्तचरों द्वारा शत्रु की गति ज्ञात हो जाए, तो बुद्धिमान राजा उसे थोड़े से प्रयास से ही युद्ध में परास्त कर सकता है ॥21॥   |   ramayan सर्ग 6.29: रावण का शुक और सारण को फटकारना,उसके भेजे गुप्तचरों का श्रीराम की दया से वानरों के चंगुल से छूटकर लङ्का में आना   ।   ramayan काण्ड 6: युद्ध काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 29: रावण का शुक और सारण को फटकारना,उसके भेजे गुप्तचरों का श्रीराम की दया से वानरों के चंगुल से छूटकर लङ्का में आना  »  श्लोक 21
 
 
श्लोक  6.29.21 
चारेण विदित: शत्रु: पण्डितैर्वसुधाधिपै:।
युद्धे स्वल्पेन यत्नेन समासाद्य निरस्यते॥ २१॥
 
 
अनुवाद
यदि गुप्तचरों द्वारा शत्रु की गति ज्ञात हो जाए, तो बुद्धिमान राजा उसे थोड़े से प्रयास से ही युद्ध में परास्त कर सकता है ॥21॥
 
If the enemy's movements are known through spies, then a wise king can defeat him in battle with very little effort.' 21॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)