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ramayan 6.29.19: अब तुम सब लोग यह जानने के लिए प्रस्थान करो कि वानर सेना के विषय में राम का क्या निश्चय है, तथा गुप्त मंत्रणा में भाग लेने वाले, उनके निकटस्थ मंत्रीगण तथा जो उनसे प्रेमपूर्वक मिले हैं और उनके मित्र बन गए हैं, उनके भी दृढ़ विचार जानने के लिए जाओ॥ 19॥   |   ramayan सर्ग 6.29: रावण का शुक और सारण को फटकारना,उसके भेजे गुप्तचरों का श्रीराम की दया से वानरों के चंगुल से छूटकर लङ्का में आना   ।   ramayan काण्ड 6: युद्ध काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 29: रावण का शुक और सारण को फटकारना,उसके भेजे गुप्तचरों का श्रीराम की दया से वानरों के चंगुल से छूटकर लङ्का में आना  »  श्लोक 19
 
 
श्लोक  6.29.19 
इतो गच्छत रामस्य व्यवसायं परीक्षितुम्।
मन्त्रेष्वभ्यन्तरा येऽस्य प्रीत्या तेन समागता:॥ १९॥
 
 
अनुवाद
अब तुम सब लोग यह जानने के लिए प्रस्थान करो कि वानर सेना के विषय में राम का क्या निश्चय है, तथा गुप्त मंत्रणा में भाग लेने वाले, उनके निकटस्थ मंत्रीगण तथा जो उनसे प्रेमपूर्वक मिले हैं और उनके मित्र बन गए हैं, उनके भी दृढ़ विचार जानने के लिए जाओ॥ 19॥
 
You all should leave now to find out what Rama's resolve is regarding the monkey army and also to find out the firm views of those who take part in the secret consultations, his close ministers, and those who have met him with love and have become his friends.॥ 19॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)