श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 29: रावण का शुक और सारण को फटकारना,उसके भेजे गुप्तचरों का श्रीराम की दया से वानरों के चंगुल से छूटकर लङ्का में आना  »  श्लोक 15
 
 
श्लोक  6.29.15 
एवमुक्तौ तु सव्रीडौ तौ दृष्ट्वा शुकसारणौ।
रावणं जयशब्देन प्रतिनन्द्याभिनि:सृतौ॥ १५॥
 
 
अनुवाद
उसके ऐसा कहने पर शुक और सारण को बड़ी लज्जा हुई और वे बड़े जयकारे के साथ रावण का जयकारा लगाकर वहाँ से चले गये।
 
At his saying this, Shuka and Saran felt very ashamed and after hailing Ravana with great cheers, they left the place.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)