Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 ramayan 6.29.14: अब तुम दोनों मेरे दरबार में आने के अधिकार से वंचित हो। मेरे पास से चले जाओ; फिर कभी मुझे अपना मुख मत दिखाना। मैं तुम दोनों को मारना नहीं चाहता; क्योंकि मैं तुम दोनों के उपकारों को सदैव स्मरण रखता हूँ। तुम दोनों मेरे प्रेम के विमुख और कृतघ्न हो, अतः मृत समान हो।॥14॥ | ramayan सर्ग 6.29: रावण का शुक और सारण को फटकारना,उसके भेजे गुप्तचरों का श्रीराम की दया से वानरों के चंगुल से छूटकर लङ्का में आना । ramayan काण्ड 6: युद्ध काण्ड । श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
अब तुम दोनों मेरे दरबार में आने के अधिकार से वंचित हो। मेरे पास से चले जाओ; फिर कभी मुझे अपना मुख मत दिखाना। मैं तुम दोनों को मारना नहीं चाहता; क्योंकि मैं तुम दोनों के उपकारों को सदैव स्मरण रखता हूँ। तुम दोनों मेरे प्रेम के विमुख और कृतघ्न हो, अतः मृत समान हो।॥14॥
‘Now both of you are deprived of the right to enter my court. Go away from me; never show your face to me again. I do not want to kill both of you; because I always remember the favors done by both of you. Both of you are averse to my love and ungrateful, hence you are as good as dead.’॥ 14॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥