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ramayan 6.28.6-7: 'राजन्! इन वानरों के बीच जो दो वानर आप खड़े हुए देख रहे हैं, वे देवताओं के समान रूप वाले मैन्द और द्विविद हैं। युद्ध में उनकी बराबरी करने वाला कोई नहीं है। इन दोनों ने ब्रह्माजी की आज्ञा से अमृतपान किया है। ये दोनों वीर अपने बल और पराक्रम से लंका को कुचलना चाहते हैं।' (6-7)   |   ramayan सर्ग 6.28: शुक के द्वारा सुग्रीव के मन्त्रियों का, मैन्द और द्विविद का, हनुमान् का, श्रीराम, लक्ष्मण, विभीषण और सग्रीव का परिचय देना   ।   ramayan काण्ड 6: युद्ध काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 28: शुक के द्वारा सुग्रीव के मन्त्रियों का, मैन्द और द्विविद का, हनुमान् का, श्रीराम, लक्ष्मण, विभीषण और सग्रीव का परिचय देना  »  श्लोक 6-7
 
 
श्लोक  6.28.6-7 
यौ तौ पश्यसि तिष्ठन्तौ कुमारौ देवरूपिणौ।
मैन्दश्च द्विविदश्चैव ताभ्यां नास्ति समो युधि॥ ६॥
ब्रह्मणा समनुज्ञातावमृतप्राशिनावुभौ।
आशंसेते यथा लङ्कामेतौ मर्दितुमोजसा॥ ७॥
 
 
अनुवाद
'राजन्! इन वानरों के बीच जो दो वानर आप खड़े हुए देख रहे हैं, वे देवताओं के समान रूप वाले मैन्द और द्विविद हैं। युद्ध में उनकी बराबरी करने वाला कोई नहीं है। इन दोनों ने ब्रह्माजी की आज्ञा से अमृतपान किया है। ये दोनों वीर अपने बल और पराक्रम से लंका को कुचलना चाहते हैं।' (6-7)
 
‘King! The two monkeys you see standing among these monkeys with deities-like appearance are Maind and Dwivid. There is no one who can match them in battle. Both of them have drunk Amrit (nectar) by the order of Brahmaji. These two brave men want to crush Lanka with their strength and valour. 6-7.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)