श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 28: शुक के द्वारा सुग्रीव के मन्त्रियों का, मैन्द और द्विविद का, हनुमान् का, श्रीराम, लक्ष्मण, विभीषण और सग्रीव का परिचय देना  »  श्लोक 42
 
 
श्लोक  6.28.42 
इमां महाराज समीक्ष्य वाहिनी-
मुपस्थितां प्रज्वलितग्रहोपमाम्।
तत: प्रयत्न: परमो विधीयतां
यथा जय: स्यान्न परै: पराभव:॥ ४२॥
 
 
अनुवाद
महाराज! यह सेना चमकते हुए ग्रह के समान है। इसकी उपस्थिति देखकर आपको ऐसा उपाय करना चाहिए जिससे आपकी विजय हो और शत्रुओं के सामने आपको अपमानित न होना पड़े।॥42॥
 
‘Maharaj! This army is like a shining planet. Seeing its presence, you should take such measures that you win and do not have to feel humiliated in front of the enemies.’॥ 42॥
 
इत्यार्षे श्रीमद्रामायणे वाल्मीकीये आदिकाव्ये युद्धकाण्डेऽष्टाविंश: सर्ग: ॥ २ ८॥
इस प्रकार श्रीवाल्मीकिनिर्मित आर्षरामायण आदिकाव्यके युद्धकाण्डमें अट्ठाईसवाँ सर्ग पूरा हुआ ॥ २ ८॥
 
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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