एषां कोटिसहस्राणि नव पञ्च च सप्त च।
तथा शङ्कुसहस्राणि तथा वृन्दशतानि च॥ ४॥
एते सुग्रीवसचिवा: किष्किन्धानिलया: सदा।
हरयो देवगन्धर्वैरुत्पन्ना: कामरूपिण:॥ ५॥
अनुवाद
इनकी संख्या इक्कीस करोड़ है - सहस्र, सहस्र शंकु और सौ वृन्दा* । ये सभी वानर सुग्रीव के मंत्री हैं जो किष्किन्धा में सदैव निवास करते हैं । इनकी उत्पत्ति देवताओं और गंधर्वों से हुई है । ये सभी अपनी इच्छानुसार रूप धारण करने में समर्थ हैं । 4-5॥
‘Their number is twenty one crore Sahasra, Sahasra Shanku and hundred Vrinda*. All these monkeys are ministers of Sugriva who always lives in Kishkindha. They originated from the gods and Gandharvas. All of them are capable of taking any form as per their wish. 4-5॥