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श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 28: शुक के द्वारा सुग्रीव के मन्त्रियों का, मैन्द और द्विविद का, हनुमान् का, श्रीराम, लक्ष्मण, विभीषण और सग्रीव का परिचय देना  »  श्लोक 37-38h
 
 
श्लोक  6.28.37-38h 
शतं खर्वसहस्राणां महाखर्वमिति स्मृतम्।
महाखर्वसहस्राणां समुद्रमभिधीयते।
शतं समुद्रसाहस्रमोघ इत्यभिधीयते॥ ३७॥
शतमोघसहस्राणां महौघा इति विश्रुत:।
 
 
अनुवाद
'एक लाख खरव एक महाखर्व बनाते हैं। एक हजार महाखर्वों को समुद्र कहा जाता है। एक लाख समुद्र को ओघ तथा एक लाख को महघ कहा जाता है। 37 1/2.
 
‘One lakh Kharvs make a Mahakharv. One thousand Mahakharvs are called Samudra. One lakh Samudra is called Ogh and one lakh Ogh is called Mahagh. 37 1/2.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)