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श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 28: शुक के द्वारा सुग्रीव के मन्त्रियों का, मैन्द और द्विविद का, हनुमान् का, श्रीराम, लक्ष्मण, विभीषण और सग्रीव का परिचय देना  »  श्लोक 31
 
 
श्लोक  6.28.31 
यस्यैषा काञ्चनी माला शोभते शतपुष्करा।
कान्ता देवमनुष्याणां यस्यां लक्ष्मी: प्रतिष्ठिता॥ ३१॥
 
 
अनुवाद
उनके गले में जो सौ कमलों की स्वर्ण माला सुशोभित है, उसमें सदैव लक्ष्मी का निवास है। देवता और मनुष्य दोनों ही उसे पाने की इच्छा रखते हैं॥31॥
 
The golden garland of hundred lotuses that adorns his neck is always the abode of Goddess Lakshmi. Both gods and humans alike desire to have it.॥ 31॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)