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ramayan 6.28.25: श्री रघुनाथजी के लिए उसे अपने प्राणों की भी चिंता नहीं है। वह युद्ध में अकेले ही समस्त राक्षसों का नाश करना चाहता है॥ 25॥   |   ramayan सर्ग 6.28: शुक के द्वारा सुग्रीव के मन्त्रियों का, मैन्द और द्विविद का, हनुमान् का, श्रीराम, लक्ष्मण, विभीषण और सग्रीव का परिचय देना   ।   ramayan काण्ड 6: युद्ध काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 28: शुक के द्वारा सुग्रीव के मन्त्रियों का, मैन्द और द्विविद का, हनुमान् का, श्रीराम, लक्ष्मण, विभीषण और सग्रीव का परिचय देना  »  श्लोक 25
 
 
श्लोक  6.28.25 
नह्येष राघवस्यार्थे जीवितं परिरक्षति।
एषैवाशंसते युद्धे निहन्तुं सर्वराक्षसान्॥ २५॥
 
 
अनुवाद
श्री रघुनाथजी के लिए उसे अपने प्राणों की भी चिंता नहीं है। वह युद्ध में अकेले ही समस्त राक्षसों का नाश करना चाहता है॥ 25॥
 
‘He does not even care about saving his life for the sake of Shri Raghunathji. He wishes to single-handedly destroy all the demons in the war.॥ 25॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)