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श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 28: शुक के द्वारा सुग्रीव के मन्त्रियों का, मैन्द और द्विविद का, हनुमान् का, श्रीराम, लक्ष्मण, विभीषण और सग्रीव का परिचय देना  »  श्लोक 24
 
 
श्लोक  6.28.24 
अमर्षी दुर्जयो जेता विक्रान्तश्च जयी बली।
रामस्य दक्षिणो बाहुर्नित्यं प्राणो बहिश्चर:॥ २४॥
 
 
अनुवाद
वह अजेय, अजेय, विजयी, पराक्रमी, शत्रु को परास्त करने वाला और बलवान है। लक्ष्मण सदैव श्री राम के दाहिने हाथ पर रहते हैं और आत्मा बाहर विचरण करती है।
 
He is invincible, invincible, victorious, valiant, defeats the enemy and is strong. Lakshman is always at the right hand of Shri Ram and the soul roaming outside.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)