श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 28: शुक के द्वारा सुग्रीव के मन्त्रियों का, मैन्द और द्विविद का, हनुमान् का, श्रीराम, लक्ष्मण, विभीषण और सग्रीव का परिचय देना  »  श्लोक 18
 
 
श्लोक  6.28.18 
यश्चैषोऽनन्तर: शूर: श्याम: पद्मनिभेक्षण:।
इक्ष्वाकूणामतिरथो लोके विश्रुतपौरुष:॥ १८॥
 
 
अनुवाद
हनुमानजी के पास बैठे हुए कमल के समान नेत्रों वाले श्यामवर्णी पराक्रमी योद्धा इक्ष्वाकुवंश के महान योद्धा हैं। उनका पराक्रम समस्त लोकों में विख्यात है॥18॥
 
The dark-skinned valiant warrior with lotus-like eyes sitting near Hanumanji is a great warrior of the Ikshwaku dynasty. His valour is renowned in all the worlds.॥ 18॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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