श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 28: शुक के द्वारा सुग्रीव के मन्त्रियों का, मैन्द और द्विविद का, हनुमान् का, श्रीराम, लक्ष्मण, विभीषण और सग्रीव का परिचय देना  »  श्लोक 14
 
 
श्लोक  6.28.14 
अनाधृष्यतमं देवमपि देवर्षिराक्षसै:।
अनासाद्यैव पतितो भास्करोदयने गिरौ॥ १४॥
 
 
अनुवाद
ऋषिगण और राक्षस भी जिन्हें पराजित नहीं कर सकते, उन भगवान सूर्यदेव तक पहुँचने में असमर्थ होकर यह वानर उदयगिरि पर गिर पड़ा॥14॥
 
Unable to reach the Sun God, who cannot be defeated even by sages and demons, this monkey fell on Udayagiri.॥ 14॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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