श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 28: शुक के द्वारा सुग्रीव के मन्त्रियों का, मैन्द और द्विविद का, हनुमान् का, श्रीराम, लक्ष्मण, विभीषण और सग्रीव का परिचय देना  »  श्लोक 12-13
 
 
श्लोक  6.28.12-13 
उद्यन्तं भास्करं दृष्ट्वा बाल: किल बुभुक्षित:।
त्रियोजनसहस्रं तु अध्वानमवतीर्य हि॥ १२॥
आदित्यमाहरिष्यामि न मे क्षुत् प्रतियास्यति।
इति निश्चित्य मनसा पुप्लुवे बलदर्पित:॥ १३॥
 
 
अनुवाद
'जब यह वानर बालक था, तब एक दिन इसे बहुत भूख लगी। उगते हुए सूर्य को देखकर यह तीन हजार योजन की ऊँचाई तक उछल पड़ा। उस समय इस अभिमानी वानर ने मन में यह निश्चय करके छलांग लगाई कि 'यहाँ के फल आदि से मेरी भूख नहीं मिटेगी, इसलिए मैं सूर्य (जो आकाश में एक दिव्य फल है) को ले आऊँगा।'
 
‘When this monkey was a child, one day he was very hungry. Seeing the rising Sun, he jumped up to a height of three thousand yojanas. At that time, this proud monkey jumped up with the determination in his mind that 'My hunger will not be satiated by the fruits etc. here, so I will bring the Sun (which is a divine fruit in the sky).'
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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