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ramayan 6.28.11: 'यह महान वानर, बल और सौंदर्य से संपन्न, अपनी इच्छानुसार कोई भी रूप धारण कर सकता है। इसकी गति कभी नहीं रुकती। यह वायु की भाँति सर्वत्र जा सकता है।'   |   ramayan सर्ग 6.28: शुक के द्वारा सुग्रीव के मन्त्रियों का, मैन्द और द्विविद का, हनुमान् का, श्रीराम, लक्ष्मण, विभीषण और सग्रीव का परिचय देना   ।   ramayan काण्ड 6: युद्ध काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 28: शुक के द्वारा सुग्रीव के मन्त्रियों का, मैन्द और द्विविद का, हनुमान् का, श्रीराम, लक्ष्मण, विभीषण और सग्रीव का परिचय देना  »  श्लोक 11
 
 
श्लोक  6.28.11 
कामरूपो हरिश्रेष्ठो बलरूपसमन्वित:।
अनिवार्यगतिश्चैव यथा सततग: प्रभु:॥ ११॥
 
 
अनुवाद
'यह महान वानर, बल और सौंदर्य से संपन्न, अपनी इच्छानुसार कोई भी रूप धारण कर सकता है। इसकी गति कभी नहीं रुकती। यह वायु की भाँति सर्वत्र जा सकता है।'
 
‘This great monkey, endowed with strength and beauty, can assume any form according to its wish. Its movement never stops. It can go everywhere like the wind.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)