श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 27: वानरसेना के प्रधान यूथपतियों का परिचय  »  श्लोक 47
 
 
श्लोक  6.27.47 
तथान्ये वानरश्रेष्ठा विन्ध्यपर्वतवासिन:।
न शक्यन्ते बहुत्वात् तु संख्यातुं लघुविक्रमा:॥ ४७॥
 
 
अनुवाद
‘इसी प्रकार विन्ध्य पर्वत पर और भी बहुत से महान् एवं बलवान वानर रहते हैं, जिनकी गणना नहीं की जा सकती, क्योंकि वे बहुत अधिक संख्या में हैं ॥ 47॥
 
‘Similarly, there are many other great and powerful monkeys living on the Vindhya mountains, who cannot be counted because they are so numerous.॥ 47॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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