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श्लोक 47
श्लोक
6.27.47
तथान्ये वानरश्रेष्ठा विन्ध्यपर्वतवासिन:।
न शक्यन्ते बहुत्वात् तु संख्यातुं लघुविक्रमा:॥ ४७॥
अनुवाद
‘इसी प्रकार विन्ध्य पर्वत पर और भी बहुत से महान् एवं बलवान वानर रहते हैं, जिनकी गणना नहीं की जा सकती, क्योंकि वे बहुत अधिक संख्या में हैं ॥ 47॥
‘Similarly, there are many other great and powerful monkeys living on the Vindhya mountains, who cannot be counted because they are so numerous.॥ 47॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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